Monday, April 2, 2018

मानव रक्‍त

मानव रक्‍त
मानव शरीर में रक्‍त की मात्रा शरीर के कुल भार का 7% है।
यह क्षारीय विलयन है जिसका pH मान 7.4 होता है।
मानव शरीर में औसतन 5-6 लीटर रक्‍त पाया जाता है।
रक्‍त के दो भाग होते हैं:
(1) प्‍लाज्‍मा, (2) रक्‍त कणिकाएं
(1) प्‍लाज्‍मा
यह रक्‍त का तरल भाग है।
रक्‍त का 60% भाग प्‍लाज्‍मा होता है। इसका 90% भाग जल, 7% प्रोटीन, 0.9% लवण और 0.1% ग्‍लूकोज होता है। शेष अन्‍य पदार्थ काफी कम मात्रा में उपस्थित होते हैं।
प्‍लाज्‍मा के कार्य – शरीर से पचे भोजन, हार्मोन, उत्‍सर्जी पदार्थों आदि का परिवहन प्‍लाज्‍मा के माध्‍यम से होता है।
सेरम – प्‍लाज्‍मा से फाइब्रिनोजन एवं प्रोटीन को निकाल देने पर शेष बचे भाग को सेरम कहते हैं।
(2) रक्‍त कणिकाएं (रक्‍त का 40% भाग) इसको तीन भागों में बांटा जाता है:
1. लाल रक्‍त कणिकाएं (आरबीसी)
 इसमें नाभिक का अभाव होता है। अपवाद – ऊँट और लामा।
आरबीसी का निर्माण अस्थि मज्‍जा में होता है। (भ्रूण अवस्‍था में इसका निर्माण यकृत में होता है।)
इसका जीवनकाल 20 से 120 दिन होता है।
इसका विनाश प्‍लीहा में होता है। इसलिये प्‍लीहा को आरबीसी की कब्रगाह कहते हैं।
इसमें हीमोग्‍लोबिन पाया जाता है, जिसमें लौह युक्‍त हीम नामक यौगिक पाया जाता है, इसके कारण रक्‍त का रंग लाल होता है।
आरबीसी का मुख्‍य कार्य सभी कोशिकाओं को ऑक्‍सीजन पहुँचाकर उससे कार्बनडाईआक्‍साइड वापस लाना होता है।
एनिमिया रोग का कारण हीमोग्‍लोबिन की कमी है।
सोते समय आरबीसी में 5% की कमी हो जाती है और 4200 मीटर की ऊँचाई पर रहने वाले लोगो के आरबीसी में 30% की वृद्धि हो जाती है।
2. श्‍वेत रक्‍त कणिकाएं (डबल्‍यूबीसी) अथवा ल्‍यूसोसाइट्स
इसका निर्माण अस्थि मज्‍जा, लिम्‍फ नोड और कभी-कभी यकृत और प्‍ली‍हा में होता है।
इसका जीवन काल 1 से 2 दिन होता है।
श्‍वेत रक्‍त कणिकाओं में नाभिक पाया जाता है।
इसका मुख्‍य कार्य शरीर की रोगो से रक्षा करना है।
आरबीसी और डबल्‍यूबीसी का अनुपात 600:1 है।
3. रक्‍त बिम्‍बाणु अथवा थ्रोम्‍बोसाइट्स:
 यह केवल मानव एवं अन्‍य स्‍तनधारियों के रक्‍त में पाया जाता है।
इसमें नाभिक का अभाव होता है।
इसका निर्माण अस्थि मज्‍जा में होता है।
इसका जीवनकाल 3 से 5 दिन का होता है।
इसकी मृत्‍यु प्‍लीहा में होती है।
इसका मुख्‍य कार्य रक्‍त का थक्‍का बनने में मदद करना है।

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